देश में कोरोना वायरस की वजह से 22 मार्च से लगे लोकडाउन-1 में पूरे देश में लगभग पूरा कामकाज बंद हो गया था। ऐसे में छोटे-छोटे गांव से महानगरों में जाकर नौकरी कर रहे लोगों का गांव आने का पलायन को मजबूर हो गए। बिहार के जमुई के दो युवक 15-16 साल से तमिलनाडु की एक फुटवियर कंपनी में काम किया करते थे, वह भी लॉक डाउन की वजह से पूरा कामकाज बंद होने पर गांव आ गए।
गांव आने पर भी उनके कदम रुके नहीं, वह तमिलनाडु में जूते चप्पल की फैक्ट्री में काम करने का उनको 15-16 साल का अनुभव था तो उन्होंने अपने गांव आकर जूते और चप्पलों की फैक्ट्री लगा ली। जमुई लक्ष्मीपुर गांव के रहने वाले अशोक दास अपने बहनोई संतोष दास के साथ 15 साल से तमिलनाडु की फुटवेयर कंपनी में काम करते थे वहां पर यह दोनों बतोर टेक्नीशियन के काम करते हुए। और यह लोग इस दौरान कई ट्रेनिंग में हिस्सा ले चुके थे । लेकिन, कोरोना काल की वजह से लोगों की परेशानी बढ़ी तो यह लोग अपने गांव की ओर रवाना हो गए। गांव आने के बाद कुछ दिन तक तो यह लोग ऐसे ही बैठे रहे, फिर इन्होंने जूते और चप्पल की फैक्ट्री लगाने की सोची।

जैसे ही अनलॉक-1 हुआ तो इन्होंने जूते और चप्पल बनाने वाली मशीन मंगा ली और फुटवियर कंपनी खोल दी। और सबसे पहले इन्होंने दिव्यांग और डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए स्पेशल चप्पल बनाने शुरू किए। पिछले 2.5-3 महीनों से ऑर्थोपेडिक्स डॉक्टरों से आए आर्डर की सप्लाई कर चुके हैंन्यूज़ 18 से बात करते हुए अशोक दास ने बताया कि इस प्रोडक्ट को ₹600 में सप्लाई करते थे वही प्रोडक्ट बाहर से मंगाने पर दो से ढाई हजार का मिलता था।
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